History in Hindi - Page 118 of 129 - देश-दुनिया के बारे में अपना ज्ञान बढ़ाओ

लार्ड विलियम बैंटिक के सामाजिक और प्रशासनिक सुधार , सती प्रथा का अंत, ठगी का अंत, सरकारी सेवाओं में भेदभाव का अंत lord william bentinck reforms in hindi

लार्ड विलियम बेंटिक भारतीय इतिहास में एक सम्मानित गवर्नर जनरल के रूप में विख्यात है। उसने भारतीय महिलाओं के विरुद्ध की जाने वाली अमानवीय प्रथा सती पर रोक लगा दी। विलियम बैंटिक ने अपने सुधारों से भारत में एक नए दौर की शुरुआत की।आज इस ब्लॉग में हम विलियम बैंटिक द्वारा किये गए सुधारों और … Read more

वॉरेन हेस्टिंग्ज -बंगाल के गवर्नर से बंगाल के गवर्नर जनरल तक- History 0f Warren Hastings

वॉरेन हेस्टिंग्ज जिसने भारत में बंगाल के गवर्नर के रूप में न्युक्ति पायी थी और जिसने अपनी साम्राज्यवादी नीति से मुग़ल साम्राज्य के प्रभुत्व का मुखौटा तोड़ डाला। उसने वास्तविकता को पहचानते हुए बंगाल पर विजय के अधिकार से शासन करने का प्रयत्न किया। उसके सामने कठिन चुनौती थी बंगाल में एक कामचलाऊ प्रशासनिक व्यवस्था … Read more

कर्नाटक में अग्रेंजों और फ्रांसीसियों के बीच संघर्ष: के कारण और वॉरेन हेस्टिंग्ज | Anglo French Rivalry In The Carnatic

पुर्तगालियों के भारत आगमन के साथ ही जलमार्ग द्वारा यूरोप और भारत के मध्य व्यापारिक संबंध बड़ी तेजी से विकसित हुए और एक-एक कर क्रमसः पुर्तगाली, डच, ब्रिटिश और फ्रेंच व्यापारी भारत में व्यापार करने आने लगे। पुर्तगाली और डच अंग्रेजी शक्ति के  सामने कमजोर पड़ गए  और शांतिपूर्वक व्यापार तक सिमित  हो गए। यूरोप … Read more

भारत शासन अधिनियम 1858 – Government of India Act 1858

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध भारतीयों द्वारा किया गया 1857 का विद्रोह यद्पि असफल रहा परन्तु इसने ब्रटिश सरकार को अपनी नीतियों में परिवर्तन हेतु बाध्य किया। भारतीयों के गुस्से को शांत करने और ब्रिटिश शासन को दृढ़ता प्रदान करने के उद्देश्य से भारत शासन अधिनियम 1858 पास किया गया। आज इस ब्लॉग में … Read more

गौतमीपुत्र शातकर्णि का इतिहास : सातवाहनों का पुनरुद्धार

शातकर्णि प्रथम की मृत्यु के पश्चात् सातवाहनों की शक्ति निर्बल पड़ने लगी।  नानघाट के लेख में उसके दो पुत्रों – वेदश्री तथा शक्तिश्री का उल्लेख मिलता है।  दोनों ही अवयस्क थे। अतः शातकर्णि प्रथम की पत्नी नायनिका ने संरक्षिका के रूप में शासन संभाला। इसके पश्चात् सातवाहनों का इतिहास अंधकारपूर्ण है। ‘सातवाहन शासक गौतमीपुत्र शातकर्णि … Read more

इंडो-ग्रीक कौन थे | Who Were Indo-Greek

मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने साम्राज्य की सीमाओं को पश्चिमोत्तर प्रदेशों तथा अफगानिस्तान पर अपना अधिकार कर लिया था। यह सिमा विस्तार उसने यूनानी शासक सेल्यूकस को हराकर किया था।इस विजय द्वारा यूनानी तथा भारतीयों के बीच मैत्री संबंध कायम हो गए ये संबंध 305-206 ईसा पूर्व तक बने रहे। परन्तु सम्राट अशोक के पश्चात् कमजोर उत्तराधिकारियों के कारण भारत पर पश्चिमोत्तर से पुनः आक्रमण प्रारम्भ हो गए। इन विदेशी आक्रमणकारियों में सर्वप्रथम आने वाले बल्ख ( बैक्ट्रिया ) के यवन शासक थे। इन्होने भारत के कुछ प्रदेशो पर विजय प्राप्त की। इन्ही भारतीय-यवन राजाओं को हिन्द-यवन (हिन्द-ग्रीक ) अथवा बख़्त्री-यवन ( बैक्ट्रियन-ग्रीक ) कहा जाता है। 

इंडो-ग्रीक कौन थे | Who Were Indo-Greek

 

इंडो-ग्रीक कौन थे 

 इंडो-ग्रीक ( यूनानी ) शासकों का इतिहास जानने के स्रोत 

हिन्द-यवन शासकों का इतिहास जानने के स्रोत के रूप में हम भारतीय ग्रंथों में मिलने वाले उनके छित-पुट उल्लेखों के साथ – रोमन क्लासिकल लेखकों के विवरण, यवन शासकों के लेख, और उनकी बहुसंख्यक मुद्राओं, को स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है। 

  महाभारत में यवन जाति का उल्लेख मिलता है। 

  • बौद्ध विद्वान नागसेन के ‘मिलिन्दपन्हो’ से हिन्द-यवन शासक मेनाण्डर के विषय में जानकारी मिलती है। 
  • क्लासिकल लेखकों में स्ट्रेबो, जस्टिन, प्लूटार्क, आदि के  विवरण से हमे हिन्द-यवन शासकों के  विषय में जानकारी मिलती है। 

इंडो-ग्रीक ( यूनानी ) शासकों के सिक्के तथा लेख 

ऐसे तमाम लेख तथा बहुसंख्या में  सिक्के प्राप्त होते हैं जिनमें हिन्द-यवन शासकों के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। हिन्द-यवन शासकों के बहुसंख्यक सिक्के पश्चिमी, उत्तरी पश्चिमी तथा मध्य भारत के विभिन्न स्थानों से प्राप्त किये गए हैं। “उत्तर-पश्चिम में स्वर्ण सिक्कों का प्रचलन सर्वप्रथम यवन शासकों ने ही करवाया था।”

indo-greek coins

यवनों का इतिहास 

  • सेल्यूकस के साम्राज्य के दो महत्वपूर्ण भाग थे – पार्थिया तथा बैक्ट्रिया।  
  • सेल्यूकस  उत्तराधिकारी एण्टियोकस प्रथम ( 281-261 ईसा पूर्व ) के समय तक दोनों भाग सेल्युकसी साम्राज्य  बने रहे। 
  • एण्टियोकस द्वितीय ( 261-246 ) ईसा पूर्व ) के  शासनकाल में 250 ईसा पूर्व लगभग दोनों प्रदेश स्वतंत्र हो गए। 
  • पार्थिया को स्वतंत्र कराने वाला अरसेक्स था। 
  • बैक्ट्रिया को स्वतंत्र कराने वाला डायोडोटस था। 

बैक्ट्रिया  स्वतंत्र यूनानी  साम्राज्य का संस्थापक डायोडोटस ( Diodots ) था। वह एक शक्तिशाली शासक था।डायोडोटस की मृत्यु के पश्चात् उसके अवयस्क पुत्र की हत्या करके यूथीडेमस एक महत्वाकांक्षी वयक्ति ने सत्ता हथिया ली। 

यूथीडेमस ( Euthydemus ) सेल्यूकस वंशीय एण्टियोकस तृतीया  यूथीडेमस के साथ युद्ध किया लेकिन  असफल रहा अंततः दोनों  में संधि हो गयी और एण्टियोकस ने यूथीडेमस को बैक्ट्रिया का शासक स्वीकार कर अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया। 

इसके पश्चात् एण्टियोकस ने हिन्दूकुश कर काबुल  के मार्ग से भारतीय शासक सोफेगसेनस ( सुभगसेन ) पर आक्रमण किया। सुभगसेन ( अशोक का कोई उत्तराधिकारी ) ने अधीनता स्वीकार करते हुए 500 हाथी उपहार में दिए। 

यूथीडेमस का साम्राज्य हिन्दुकुश तक ही सीमित था। भारत पर यूथीडेमस के आक्रमण का कोई उल्लेख नहीं मिलता। सम्भवतः  शक्तिशाली पुत्र डेमोट्रियस ने भारत पर आक्रमण का प्रारम्भ किया। 

डेमेट्रियस 190 ईसा पूर्व  लगभग यूथीडेमस की मृत्यु  पश्चात् उसका पुत्र डेमेट्रियस बैक्ट्रिया के यवन साम्राज्य का शासक बना। वह एक महत्वकांक्षी शासक था और एक विशाल सेना के साथ उसने हिंदुकुश की पहाड़ियों को पार कर पंजाब पर विजय प्राप्त की। 

डेमेट्रियस ने पश्चिमी पंजाब तथा सिंधु की निचली घाटी पर अधिकार कर लिया। इन प्रदेशों से उसकी ताम्र की मुद्राएं मिली हैं। इन मुद्राओं  पर ‘तिमित्र’ खुदा हुआ है। यह लेख यूनानी तथा खरोष्ठी लिपि में लिखे हैं। 

 यूक्रेटाइडीज ( Eucratides ) डेमेट्रियस जिस समय भारत में विजय हासिल कर रहा था उसी समय यूक्रेटाइडीज ने उसका राज्य हड़प लिया।   यूक्रेटाइडीज ने अपने को 1000 नगरों का शासक बना लिया।जस्टिन ने उसकी भारतीय विजयों का उल्लेख किया है। उसके सिक्के पश्चिमी पंजाब में पाए गए हैं।उसके यूनानी तथा खरोष्ठी लिपि में लेख मिलते हैं। 

 यूक्रेटाइडीज की भारतीय विजयों के फलस्वरूप पश्चिमोत्तर भारत में दो यवन राज्य स्थापित हो गये। 

(1)   यूक्रेटाइडीज तथा उसके वंशजों का राज्य – यह बैक्ट्रिया से झेलम नदी तक विस्तृत था तथा इसकी राजधानी तक्षशिला थी। 

(2) यूथीडेमस के वंशजों का राज्य – यह झेलम से मथुरा तक फैला था तथा शाकल ( स्यालकोट ) इसकी राजधानी थी। 

जस्टिन के विवरण से पता चलता है कि   यूक्रेटाइडीज की हत्या उसके पुत्र हेलियोक्लीज द्वारा की गयी। 125 ईसा पूर्व के लगभग बैक्ट्रिया से यवन शासन समाप्त हो गया और वहां शकों का शासन स्थापित हो गया। हेलियोक्लीज  काबुल घाटी तथा सिंधु स्थित अपने राज्य वापस लौट आया। 

    मेनाण्डर 

मेनाण्डर (शासनकाल 155-130 ईसा पूर्व) एक इंडो-ग्रीक राजा था जिसने हेलेनिस्टिक काल के दौरान उत्तरी भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया था। वह सबसे प्रसिद्ध इंडो-ग्रीक राजाओं में से एक थे और बौद्ध धर्म के संरक्षण के साथ-साथ उनकी सैन्य विजय और सांस्कृतिक उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं।

मेनाण्डर मूल रूप से इंडो-ग्रीक राजा डेमेट्रियस I के शासन के तहत एक स्थानीय भारतीय क्षत्रप (गवर्नर) था। हालाँकि, उसने अंततः डेमेट्रियस के खिलाफ विद्रोह किया और भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में अपना राज्य स्थापित किया, जिसमें वर्तमान अफगानिस्तान, पाकिस्तान शामिल थे। , और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों।

मेनाण्डर बौद्ध धर्म में अपने रूपांतरण और बौद्ध शिक्षाओं के समर्थन के लिए प्रसिद्ध है। उनका उल्लेख कई बौद्ध ग्रंथों में मिलता है, जिनमें मिलिंदपन्हा, मेनेंडर और बौद्ध ऋषि नागसेन के बीच एक दार्शनिक संवाद शामिल है। किंवदंती के अनुसार, मेनेंडर को बौद्ध ग्रंथों में “मिलिंदपन्हों” ( मिलिंद-प्रश्न ) के नाम से भी जाना जाता था।

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पुष्यमित्र शुंग का इतिहास: शुंग वंश का संस्थापक 

प्राचीन भारतीय इतिहास के प्रथम चक्रवतीय साम्राज्य मौर्य वंश का पतन १८४ ईसा पूर्व में हुआ।  मौर्य वंश के अंतिम शासक ब्रहद्रथ की हत्या उसके मंत्री पुष्यमित्र द्वारा की गयी और शुंग वंश की स्थापना की गयी। शुंग वंश की स्थापना से ब्राह्मण धर्म की उन्नति हुयी और बौद्ध धर्म की अवनति। आज इस ब्लॉग … Read more

Subhash Chandra Bose and Azad Hind Fauj

You often read the names of Azad Hind Fauj and Subhash Chandra Boss in the history of the Indian independence movement. The Azad Hind Fauj fought directly with the British government for the independence of India during the Second World War. Although there was the help of the Japanese government behind him and as soon … Read more

Mauryan Art and Architecture

Mauryan India is also famous for its diverse art and architecture. Chaityas and Viharas with various inscriptions were also built during the Maurya period. Today in this blog we will learn about Mauryan art and architecture. In most competitive exams, questions are asked on the subject of art and architecture. This blog will prove beneficial … Read more

Ancient India: 50 Very Important Questions and Answers

  Ancient India: 50 Very Important Questions and Answers 1- Who first discovered the stone age in India? Answer – The Indian Paleolithic was first discovered by Robert Bruce Foote in 1863 when lithography of the Pre-Stone Age was obtained from a place called Pallavaram near Chennai (Madras).  2- Where is the Belan River valley? … Read more

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