नगरीय व्यवस्था का पतन: सिन्धु सभ्यता का अंत, संभावित कारण

सिंधु सभ्यता, नगरीय व्यवस्था का पतन का अंत कब हुआ और कैसे हुआ यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। विभिन्न विद्वानों ने सिर्फ अनुमान ही व्यक्त किया है। सिंधु सभ्यता का अंत कुछ विवादित है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस सभ्यता का अंत लगभग 1900 ईसा पूर्व हुआ था, जब वे … Read more

हड़प्पा सभ्यता की भाषा, लिपि, बाट और माप | Language, Script, Weights, and Measures of Harappan Civilization in hindi

हड़प्पा सभ्यता के निवासी व्यापार और कृषि के माध्यम से अपना जीवन-यापन करते थे। वे दैनिक जीवन के साथ व्यापार में में विभिन्न माप-तौल की विधियों से परिचित थे। उनकी भाषा क्या थी? यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि यह अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। आइये जानते हैं हड़प्पा सभ्यता … Read more

उपनिषद: उपनिषद का अर्थ, महत्व और उपयोगिता

उपनिषद प्राचीन भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रन्थ हैं। उपनिषद का अर्थ है गुरु के निकट बैठकर ज्ञान प्राप्त करना। आज इस लेख में हम उपनिषदों के अर्थ और भारतीय संस्कृति में उपनिषद का महत्व और उपयोगिता क्या है? के विषय में जानेंगे। प्राचीन भारतीय धार्मिक ग्रंथों में उपनिषदों का अपना एक विशेष महत्व है। … Read more

कालीबंगा: भारत में हड़प्पा स्थल का इतिहास, महत्व

कालीबंगा राजस्थान के उत्तरी भाग में घग्गर (प्राचीन सरस्वती) नदी के बाएं किनारे पर स्थित है। इसमें दो टीले शामिल हैं। छोटा वाला पश्चिम की ओर और बड़ा वाला पूर्व की ओर। मोहनजो-दारो में समान स्वभाव को याद करते हुए। कालीबंगा: इतिहास कालीबंगा भारत में राजस्थान राज्य में स्थित एक महत्वपूर्ण हड़प्पा पुरातात्विक स्थल है। … Read more

चोल राजवंश: Chola Dynasty: History, Achievements, and Legacy

संगम युगीन राज्यों में सबसे शक्तिशाली राजवंश, चोल राजवंश था। तमिल साहित्य में उन्हें चोल ( chola ) अथवा ने कोला ( Cola ) भी कहा गया है। अज्ञात पुरातनता के दक्षिण भारतीय तमिल शासकों को भी लिखा, जो प्रारंभिक संगम कविताओं (  200 ईस्वी ) से पहले थे। चोल राजवंश की उत्पत्ति समृद्ध कावेरी  … Read more

चाणक्य: जीवनी, राजनीतिक सिद्धांत और विरासत – आप सभी को पता होना चाहिए

चाणक्य, जिन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, (300 ईसा पूर्व में प्रसिद्ध हो गए), हिंदू राजनेता और दार्शनिक जिन्होंने राजनीति पर एक क्लासिक ग्रंथ लिखा, अर्थशास्त्र (राजनीति से संबंधित “भौतिक लाभ का विज्ञान”), लगभग सब कुछ का संकलन जो भारत में लिखा गया था। अपने समय तक के अर्थ (संपत्ति, … Read more

कांची के महेंद्रवर्मन प्रथम: दक्षिणी भारतीय इतिहास में उपलब्धियां और योगदान

महेन्द्रवर्मन प्रथम पल्लव वंश का शासक था जिसने लगभग 600 सीई से 630 सीई तक दक्षिण भारत में कांची (वर्तमान कांचीपुरम) के क्षेत्र पर शासन किया था। वह सिंहविष्णु के पुत्र थे, जो एक उल्लेखनीय पल्लव राजा भी थे। महान पल्ल्व राजाओं की सूची में  सर्वप्रथम सिंहवर्मन के पुत्र तथा उत्तराधिकारी सिंहविष्णु (575-600) का नाम … Read more

नागवंश का इतिहास-संक्षिप्त विवरण

कुषाणों के पतन के पश्चात् और गुप्तों के उदय से पूर्व तक का प्राचीन भारतीय इतिहास राजनैतिक दृष्टि से विकेन्द्रीकरण तथा विभाजन का काल माना गया है। इस समय देश में कोई शक्तिशाली सार्वभौम शक्ति नहीं थी। रामपूर्ण देश टूटकर छोटे-बड़े राज्यों में विभाजित हो गया था। चारों तरफ आरजकता व्याप्त थी। अव्यवस्था का बोलबाला … Read more

सिन्धु सभ्यता की नगर योजना/स्थानीय शासन की प्रमुख विशेषताएं

सिंधु सभ्यता की एक विशेष नगर योजना थी। सिंधु सभ्यता के जितने भी स्थल प्राप्त हुए हैं उन सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। हड़प्पा सभ्यता जिसे सिंधु सभ्यता भी कहा जाता है, विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। एक एक शहरी सभ्यता थी जो अपने विशाल भवनों और सड़कों तथा स्थानीय शासन के लिए … Read more

तक्षशिला | तक्षशिला विश्वविद्यालय किस शासक द्वारा स्थापित किया गया

प्राचीन भारतीय इतिहास में शिक्षा का कितना महत्व था यह हम भारत के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला से समझ सकते हैं। तक्षशिला प्राचीन भारत में शिक्षा का एक प्रसिद्द केंद्र था। यह पश्चिमी पंजाब के रावलपिण्डी नगर में लगभग बत्तीस किलोमीटर दूर स्थित था। तक्षशिला के विषय में ऐसा कहा जाता है कि राम छोटे … Read more