French revolution - History in Hindi

फ्रांसीसी क्रांति और महिलाऐं | French Revolution and Women

इतिहासकार जूल्स माइकलेट ने अपने इतिहास की फ्रांसीसी क्रांति में लिखा है “पुरुषों ने बैस्टिल ले लिया, महिलाओं ने राजा को ले लिया”, इस प्रकार क्रांतिकारी घटनाओं में महिलाओं की गतिशील भूमिका को रेखांकित किया।  French Revolution and Women | फ्रांसीसी क्रांति और महिलाऐं जबकि ओलम्पे डे गॉजेस, चार्लोट कॉर्डे, मैडम रोलैंड और थेरोइग्ने डे … Read more

French Revolution 1789 in Hindi | फ्रांस की क्रांति 1789: क्रांति के कारण, क्रांति की घटनाएं और परिणाम

French Revolution 1789 in Hindi | फ्रांस की क्रांति 1789: क्रांति के कारण, क्रांति की घटनाएं और परिणाम

फ्रांस की क्रांति जिसने विश्व में होने वाली सभी क्रांतियों का मार्गदर्शन किया अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्रांति न सिर्फ फ्रांस में निरंकुश शासन का अंत कर संवैधानिक और लोकतान्त्रिक शासन की स्थापना की बल्कि नागरिक अधिकारों और समान भ्रातत्व की भावना को लागु किया। आज इस लेख में हम फ्रांसीसी क्रांति 1789 के प्रमुख कारणों, घटनाओं और परिणाम का अध्ययन करेंगे। लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

French Revolution 1789 in Hindi | फ्रांस की क्रांति 1789: क्रांति के कारण, क्रांति की घटनाएं और परिणाम, फ्रांस की क्रांति जिसने विश्व में होने वाली सभी क्रांतियों का मार्गदर्शन किया अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्रांति न सिर्फ फ्रांस में निरंकुश शासन का अंत कर संवैधानिक और लोकतान्त्रिक शासन की स्थापना की बल्कि नागरिक अधिकारों और समान भ्रातत्व की भावना को लागु किया।

French Revolution 1789 in Hindi | फ्रांस की क्रांति 1789

क्रान्ति से पूर्व फ्रांस की राजनितिक व्यवस्था दैवीय सिद्धांत पर आधारित थी। क्रान्ति के विस्फोट से पहले वहाँ की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति के विषय में अवश्य जानना चाहिए जो क्रांति के लिए जिम्मेदार थी।

क्रांति के समय फ्रांस में एक निरंकुश राजतंत्र था और राजा के पास असीमित अधिकार थे। पूरा समाज विशेषाधिकारों (प्रथम एस्टेट्स, द्वितीय एस्टेट्स और तृतीय एस्टेट्स) के आधार पर बंटा हुआ था।

  • प्रथम एस्टेट्स – कुलीन यानी राजा और उसके रिश्तेदार तथा सामंत लोग शामिल थे।
  • द्वितीय एस्टेट्स – पादरी वर्ग शामिल था और
  • तृतीय एस्टेट्स – समान्य जनता-किसान, मजदुर, शिक्षक, वकील, दार्शनिक, और अन्य सभी।

पुरोहितों और सामंतों का समाज में उच्च स्थान था, जबकि आम लोगों का स्थान निम्न था। लंबे और महंगे विदेशी युद्धों, शाही दरबार की फिजूलखर्ची और दोषपूर्ण कर प्रणाली के कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति चरमरा गई थी।

प्रथम और द्वितीय एस्टेट्स के लोग करमुक्त थे।

फ्रांस के लोगों को धार्मिक स्वतंत्रता नहीं थी। चर्च का विरोध करने वालों को सताया गया। फ्रांस में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभाव था। विचारों की अभिव्यक्ति और प्रकाशन की स्वतंत्रता नहीं थी। कुल मिलाकर, फ्रांस में चारो तरफ अराजकता व्याप्त थी और सामान्य जनता त्रस्त थी।

French Revolution 1789 in Hindi | क्रान्ति से पूर्व फ्रांस की स्थिति

हम अध्ययन की सुविधा के लिए फ्रांस की क्रान्ति से पूर्व की स्थिति को निम्नलिखित शीर्षकों में विभाजित किया जा सकता है

(1 ) राजनीतिक स्थिति,
(2 ) आर्थिक स्थिति,
(3 ) सामाजिक स्थिति, और
(4 ) धार्मिक स्थिति।

French Revolution 1789 in Hindi | फ्रांस की क्रांति 1789: क्रांति के कारण, क्रांति की घटनाएं और परिणाम

(1) राजनीतिक स्थिति

अठारहवी शताब्दी में राजशाही की निरंकुशता फ्रांसीसी राजनीतिक व्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता थी। निरंकुशता की इस परंपरा के संस्थापक लुई चौदहवें थे, जिन्होंने 1661 से 1715 ई. तक फ्रांस पर शासन किया। इस दीर्घकाल में उसने एक स्थायी सेना का गठन किया, सामंतों का कठोरता से दमन किया, उन्हें प्रशासनिक अधिकारों से वंचित किया और प्रशासन व्यवस्था का पूर्ण केन्द्रीकरण कर दिया। उसके प्रयासों के फलस्वरूप फ्रांस के राजा के हाथों में असीमित अधिकार केंद्रित हो गए। वह कार्यकारी, विधायी और न्यायिक सभी शक्तियों का स्वामी था।

प्रशासन पर राजा का नियंत्रण इतना अधिक था कि वह कोई भी कानून बना सकता था, किसी भी प्रकार का कर लगा सकता था, युद्ध की घोषणा कर सकता था और महत्वपूर्ण मामलों का निर्णय स्वयं कर सकता था। लुई XIV के उत्तराधिकारी – लुई XV और लुई XVI, दोनों पूरी तरह से अयोग्य थे। लुई XV न केवल कमजोर साबित हुआ बल्कि फ्रांस और उसके हितों के प्रति विलासी और लापरवाह भी साबित हुआ। उनके शासनकाल के दौरान, वर्साय विलासिता और साज़िश का केंद्र बन गया।

उनके उत्तराधिकारी लुई सोलहवें के शासनकाल में स्थिति और भी खराब हो गई। उनमें न तो स्वयं निर्णय लेने की क्षमता थी और न ही वे दूसरों की सलाह समझ सकते थे। उन्हें राज्य की समस्याओं से कोई विशेष सरोकार नहीं था। परिणामस्वरूप लुई XV तथा लुई सोलहवें की असावधानी एवं अक्षमता के कारण फ्रांस का प्रशासन पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। निरंकुश राजशाही, जो अब तक फ्रांसीसी राजनीतिक व्यवस्था की मुख्य विशेषता थी, अब बदली हुई स्थिति में एक अभिशाप बन गई।

Read more