सिंधु सभ्यता की प्रमुख विशेषताएं: सामाजिक, आर्थिक, धर्मिक और राजनीतिक जीवन

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हड़प्पा सभ्यता अथवा सिंधु सभ्यता जो विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। उस सभ्यता के निवासी जिस प्रकार अपना जीवन व्यतीत करते थे वह निश्चित ही आधुनिक सभ्यता को टक्कर देता है। आज इस ब्लॉग में हम हड़प्पा सभ्यता के सामाजिक , आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक और कला का अध्ययन करेंगें।

सिंधु सभ्यता की प्रमुख विशेषताएं: सामाजिक, आर्थिक, धर्मिक और राजनीतिक जीवन

सिंधु सभ्यता- Indus Valley Civilization

हड़प्पा सभ्यता एक प्राचीन भारतीय सभ्यता थी, जो बौद्धिक और वाणिज्यिक विकास के लिए जानी जाती है। यह सभ्यता क्रिस्तपूर्व 2600 से 1900 ईस्वी तक विकसित हुई थी और उत्तर पश्चिम भारत के पाकिस्तान और हरियाणा क्षेत्र में स्थित थी।

हड़प्पा सभ्यता के लोग विशाल शहरों में रहते थे और वस्तुओं के व्यापार करते थे। इन शहरों के आधार पर, इस सभ्यता के लोगों को शहरी भी माना जाता है।

इस सभ्यता के लोगों का जीवन ध्यान केंद्रित था और इनकी संस्कृति धार्मिक रूप से समृद्ध थी। इस सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक उनकी भाषा है, जो अभी भी समझ में नहीं आती है। इसके अलावा, हड़प्पा सभ्यता ने मोहनजोदड़ो सभ्यता के साथ व्यापार किया था और इसके साथ-साथ उनकी संचार और नौसेना कौशल भी उत्कृष्ट थे।

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का सामाजिक जीवन- Social Life

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का सामाजिक और आर्थिक जीवन व्यवस्थित और संगठित था। सिंधु घाटी की आबादी में आस्ट्रेलियाई, भूमध्यसागरीय, मंगोलॉयड और अल्पाइन जातियां शामिल थीं। मोहनजोदड़ो की अनुमानित जनसंख्या 35000 थी।

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का सामाजिक जीवन
हड़प्पावासियों का भोजन-Harappan food

हड़प्पावासियों के भोजन की आपूर्ति शहर के आसपास के क्षेत्रों में खेती वाले व्यापक क्षेत्रों से की जाती थी। चावल शायद सिंधु घाटी में उगाया जाता था। लोगों के मुख्य भोजन में गेहूं, जौ, चावल, दूध और कुछ सब्जियां जैसे मटर, तिल और खजूर जैसे फल शामिल थे। बीफ, मटन, पोर्क, पोल्ट्री, मछली आदि भी सिंधु लोग खाते थे। कृषि सिंधु लोगों का मुख्य व्यवसाय प्रतीत होता है। हड़प्पा में एक अन्न भंडार की खोज इस बात का समर्थन करती है।

हड़प्पावासियों के वस्त्र-Harappan clothing

बड़ी संख्या में तकिये की खोज से यह सिद्ध होता है कि सूती कपड़े सामाजिक वस्त्रों की बुनाई के लिए उपयोग किए जाते हैं। ऊन का भी प्रयोग किया जाता था। हो सकता है कि कपड़े सिल दिए गए हों। स्त्री और पुरुष दोनों ने कपड़े के दो टुकड़ों का इस्तेमाल किया। पुरुषों ने कुछ निचले वस्त्र जैसे धोती और ऊपरी वस्त्र शॉल की तरह पहने थे। ऊपरी वस्त्र ने बाएँ कंधे को लपेटा। महिलाओं की पोशाक पुरुषों की तरह ही थी।

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सिन्धु सभ्यता की नगर योजना/स्थानीय शासन की प्रमुख विशेषताएं

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सिंधु सभ्यता की एक विशेष नगर योजना थी। सिंधु सभ्यता के जितने भी स्थल प्राप्त हुए हैं उन सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। हड़प्पा सभ्यता जिसे सिंधु सभ्यता भी कहा जाता है, विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। एक एक शहरी सभ्यता थी जो अपने विशाल भवनों और सड़कों तथा स्थानीय शासन के लिए … Read more

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हड़प्पा सभ्यता से संबंधित इम्पोर्टेन्ट प्रश्नोत्तरी

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दोस्तों हड़प्पा सभ्यता से संबंधित इम्पोर्टेन्ट  प्रश्नों की प्रश्नोत्तरी लेकर आये है। इसे हमने तीन भागों में बांटा है जिसमें 50 परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर की प्रथम श्रृंखला आपके लिए लाये हैं। आगामी टीजीटी और पीजीटी इतिहास की परीक्षा में हमें उम्मीद है यह आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगी।  अगर हमारा यह प्रयास पसंद आये तो अपने … Read more

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हड़प्पा सभ्यता: सामाजिक और आर्थिक जीवन, महत्वपूर्ण स्थल और पतन के कारण

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प्राचीन दुनिया में जब लोगों को ठीक से रहना भी नहीं आता था, उस समय भारत में एक पूर्ण विकसित सभ्यता अस्तित्व में थी। इस सभ्यता को हड़प्पा अथवा सिंधु सभ्यता के नाम से जाना जाता है। इस सभ्यता से प्राप्त अवशेषों के आधार के आधार पर हड्डपा सभ्यता का सामाजिक और आर्थिक जीवन के विषय में इस लेख में चर्चा की जाएगी। लेख को अंत तक तक अवश्य पढ़ें।
हड़प्पा सभ्यता: सामाजिक और आर्थिक जीवन, महत्वपूर्ण स्थल और पतन के कारण

हड़प्पा सभ्यता: सामाजिक जीवन

हड़प्पा सभ्यता में परिवार सामाजिक जीवन का मुख्य आधार था। परिवार में सब लोग प्रेमपूर्वक रहते थे। परिवार का मुखिया माता को माना जाता था यानि हड़प्पा सभ्यता में समाज मातृसत्तात्मक था।मोहनजोदड़ो की खुदाई से सामजिक विभाजन के संकेत प्राप्त होते हैं।सम्भवतः समाज चार वर्णों में विभाजित था- विद्वान-वर्ग, योद्धा, व्यापारी तथा शिल्पकार और श्रमिक। 

  • विद्वान वर्ग के अंतर्गत  सम्भवतः  पुजारी, वैद्य, ज्योतिषी तथा जादूगर सम्मिलित थे। 
  • समाज में पुरोहितों का सम्मानित स्थान था। 
  • हड़प्पा सभ्यता में मिले मकानों की विभिन्नता के आधार पर कुछ विद्वानों ने समाज जाति प्रथा के प्रचलित  अनुमार लगाया है। 
  • खुदाई में प्राप्त तलवार, पहरेदारों भवन तथा प्राचीरों अवशेष मिलने से वहां क्षत्रिय जैसे किसी योद्धा वर्ग के  अनुमान लगाया जाता है। 
  • तीसरे वर्ग में व्यापारियों तथा शिल्पियों जैसे पत्थर काटने वाले, खुदाई करने वाले, जुलाहे, स्वर्णकार, आदि को शामिल किया  है। 
  • अंतिम वर्ग में विभिन्न अन्य व्यवसायों से जुड़े लोग जैसे- श्रमिक, कृषक, चर्मकार, मछुआरे, आदि। 
  •  कुछ विद्वान हड़प्पा सभ्यता में दास प्रथा के प्राचलन का भी अनुमान लगते हैं। 
  • परन्तु एस. आर. राव ने दास प्रथा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया है। 

हड़प्पा सभ्यता में नारी का स्थान

 हड़प्पा सभ्यता में नारी का बहुत ऊँचा स्थान था।वह सभी सामाजिक  धार्मिक कार्यों तथा उत्सवों में पुरुषों  समान ही भाग थी।अधिकांश महिलाऐं घरेलु कार्यों से जुडी थीं। पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था।

सिंधु सभ्यता के लोगों का भोजन

  • सिंधु सभ्यता  शाकाहारी तथा माँसाहारी दोनों प्रकार का भोजन ग्रहण करते थे। 
  • गेहूँ, जौ, चावल, तिल, दाल आदि प्रमुख खाद्यान्न थे। 
  • शाक-सब्जियां, दूध तथा विभिन्न प्रकार फलों खरबूजा, तरबूज, नीबू, अनार, नारियल आदि का सेवन करते थे। 
  • मांसाहारी भोजन में सूअर, भेड़-बकरी, बत्तख, मुर्गी, मछलियां, घड़ियाल आदि खाया जाता था। 

सिन्धुवासियों के वस्त्र

  • सिन्धुवासी सूती तथा ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्रों का प्रयोग करते थे। 
  • स्त्रियां जूड़ा बांधती थीं तथा पुरुष लम्बे-लम्बे बाल तथा दाढ़ी-मुँछ रखते थे। 

 हड़प्पा सभ्यता  आभूषण

  • महिलाऐं तथा पुरुष दोनों ही आभूषणों का इस्तेमाल करते थे जैसे- अंगूठी, कर्णफूल, कंठहार आदि। 
  • हड़प्पा से सोने के मनकों वाला छः लड़ियों का एक सुन्दर हार मिला है। 
  • छोटे-छोटे सोने तथा सेलखड़ी  निर्मित मनकों वाले हार बड़ी संख्या में मिले। हैं 
  • मोहनजोदड़ो से मार्शल ने एक बड़े आकर का हार प्राप्त किया है जिसके बीच  गोमेद के मनके हैं। 
  • कांचली मिटटी, शंख तथा सेलखड़ी की बानी चूड़ियां मिली हैं। 
  • सोने, चांदी, तथा कांसे की चूड़ियां, मिटटी और तांबे की अंगूठियां भी मिली हैं। 
  • मोहनजोदड़ो की स्त्रियां काजल, पाउडर, तथा श्रृंगार प्रसाधन का प्रयोग  थीं। 
  • चन्हूदड़ो से लिपस्टिक  साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। 
  • शीशे, कंघी, का भी प्रयोग  था। 
  • तांबे  दर्पण, छूरे, कंघें, अंजन लगाने की शलाइयाँ, श्रृंगादान आदि  हैं। 
  • आभूषण बहुमूल्य पत्थरों, हाथी-दांत, हड्डी और शंख के बनते थे। 
  • खुदाई में घड़े, थालियां, कटोरे, तश्तरियां, गिलास, चम्मच आदि बर्तन  हैं  आलावा चारपाई, स्टूल, चटाई  प्रयोग  था। 
  •  ऋग्वेदिककालीन भाषा और काव्य 

सिन्धुवासियों के मनोरंजन के साधन

  • पासा इस सभ्यता के लोगों का प्रमुख खेल था। 
  • हड़प्पा से मिटटी, पत्थर तथा  मिटटी के बने सात पासे मिले हैं। 
  • सतरंज जैसे कुछ गोटियां भी मिली हैं जो मिटटी, शंख, संगमरमर, स्लेट, सेलखड़ी आदि से बनीं हैं। 
  • नृत्य भी प्रिय साधन था जैसा कि मोहनजोदड़ो से कांस्य निर्मित नृत्य मुद्रा में मिली मूर्ति  प्रतीत होता है। 
  • जंगली जानवरों  शिकार भी मनोरंजन  साधन था
  • मछली फंसना तथा चिड़ियों  शिकार करना नियमित व्यवसाय था। 
  • मिटटी की बानी खिलौना गाड़ियां मिली हैं जिनसे खेलते होंगे। 

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हड़प्पा सभ्यता से संबंधित प्रमुख पुरातत्ववेत्ता | Major archaeologist related to Harappan civilization

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हड़प्पा सभ्यता को दुनियां के नक्से पर लाने वाले पुरातत्ववेत्ता जिनके नाम ही हम सुनते हैं, जैसे जॉन मार्शल, दयाराम साहनी, राखालदास बनर्जी, मार्टिन व्हीलर, अमलानंद घोष, अर्नेस्ट मैके, अरेल स्टीन, जे. पी. जोशी आदि।  इस लेख के द्वारा हम तीन  प्रमुख पुरातत्ववेत्ताओं सर जॉन मार्शल, दयाराम साहनी और राखालदास बनर्जी के विषय में विस्तार … Read more

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