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हिजाब मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट में पूछे गए तीखे सवाल -घूंघट, पगड़ी, बिंदी, चूड़ी क्रॉस आदि पर छूट तो हिजाब पर आपत्ति क्यों?

हिजाब मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट में पूछे गए तीखे सवाल -घूंघट, पगड़ी, बिंदी, चूड़ी क्रॉस आदि पर छूट तो हिजाब पर आपत्ति क्यों?
कर्णाटक शिक्षा अधिनियम का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि जब शिक्षण संसथान ड्रेस बदलेगा या बदलना चाहता है तो उसे छात्रों के अभिभावकों को एक वर्ष पहले नोटिस जारी कर सूचित करना पड़ेगा। 

Karnataka hijab controversy is polarising its classrooms
फोटो क्रेडिट -bbc.com


जानिए विस्तार से खबर

बुधवार को हिजाब  चौथे दिन सुनवाई करते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता की और से बहस करते हुए अधिवक्ता रवि वर्मा ने अपनी दलील में कहा कि सिर्फ हिजाब पर आपत्ति क्यों? जबकि दुपट्टा, चूड़ियां, पगड़ी, कृपाण, क्रॉस, बिंदी, जैसे अनेक धार्मिक और समुदाय विशेष के प्रतीक चिन्ह लोगों द्वारा रोज धारण किया जाता है तो सिर्फ हिजाब पर सवाल क्यों ?
       बहस जारी रखते हुए अधिवक्ता  रवि वर्मा  मैं यहाँ सिर्फ समाज में प्रचलित सभी वर्गों के धार्मिक और सामाजिक प्रतीकों की विविधता को उजागर कर रहा हूँ। लेकिन सरकार ने हिजाब को लेकर भेदभावपूर्ण रवैया क्यों अपनया है? वर्मा ने कहा ये सिर्फ एक धर्म विशेष के कारण है कि उसके याचिकाकर्ता को कक्षा के बाहर भेजा जा रहा है। बिंदी, चूड़ी या अन्य धार्मिक प्रतीकों को धारण की हुई लड़कियों को क्यों नहीं बाहर भेजा ? उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 15 का उलंघन बताया है
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आज भी जारी रहेगी सुनवाई

   रवि वर्मा ने राज्य सरकार की अधिसूचना को अवैध ठहराते हुए स्पष्ट किया कि कर्नाटक शिक्षा अधिनियम में इस संबंध में कोई प्रावधान है ही नहीं। हिजाब विवाद पर आज ढाई बजे से फिर होगी सुनवाई। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि अगर कॉलेज ने ड्रेस के सम्बंध में कोई निर्णय  तो उसकी सूचना छात्रों के अभिभावकों को एक वर्ष पहले बतानी थी। इसके लिए कर्नाटक एजुकेशन एक्ट का हवाला प्रस्तुत किया गया जिसमें यह स्पष्ट है की ड्रेस बालने के संबंध  में  एक वर्ष पूर्व नोटिस जारी करना होगा।
जब कॉलेज में ड्रेस कोड ही नहीं तो फिर रोक क्यों
   हिजाब समर्थन में  आगे आई छात्राओं के वकील ने सवाल किया कि जब प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में ड्रेस कोड के संबंध में नियम ही नहीं है तो हिजाब पर रोक कैसे लग सकती है। आखिर सरकार  ने किस नियम के तहत रोक लगाई? उन्होंने कहा महाविद्यालय विकास परिषद के पास इस विषय में किसी प्रकार का नियम तय करने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा
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बीजेपी विधायक हैं कॉलेज कमेटी के अध्यक्ष

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रवि कुमार ने इस बात पर भी आपत्ति उठाई कि उड्डुपी के भाजपा विधायक कॉलेज की कमेटी के अध्यक्ष और वे एक राजनीतिक दल की विचारधार का प्रतिनिधित्व करते हैं क्या वे विद्यार्थियों केहित में काम कर सकते हैं ? उन्होंने कहा कि इस तरह के राजनीतिक लोगों को कमेटी में शामिल करना लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है।

साध्वी ठाकुर प्रज्ञा सिंह ने क्या कहा इस मामले में ?


      अक्सर अपने बयानों से विवादों में रहने वाली बीजेपी की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा मुस्लिम छात्राएं हिजाब घर और मदरसे में पहने और शिक्षण  संस्थानों  में इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। भोपाल से बीजेपी सांसद ने कहा कि हिन्दू महिलाओं की पूजा करते हैं उन्हें बुरी नजर से नहीं देखते।
   साध्वी ने कहा आप अगर हिजाब या खिजाब पहनना चाहती हैं तो मदरसा में जाएँ उससे किसी को कोई आपत्ति नहीं वहां आपके अपने नियम हैं। लेकिन अगर कॉलेज में पढ़ना है तो स्कूल और कॉलेज के नियमानुसार ही चलना होगा, अगर वे कॉलेज के अनुशासन को भंग करती हैं तो यह बर्दास्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने आगे कहा की हिन्दू बच्चे जब गुरुकुल में होते हैं तो भगवा पहनते हैं मगर जब वही बच्चे कॉलेज और स्कूल में होते हैं तो वहां की यूनिफार्म का पालन करते हैं इसी तरह सभी को इसका पालन करना चाहिए। 

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